निदेशिका का संदेश (Message from the Director)
प्रिय संस्कृतप्रेमिणः,
सप्रेम नमः।
"संस्कृतं नाम दैवी वागनव्यक्ता महेश्वरात्" – यह वाणी हमें स्मरण कराती है कि संस्कृत केवल भाषा नहीं, अपितु हमारी सांस्कृतिक आत्मा की अभिव्यक्ति है। संस्कृत पाठशाला का मुख्य उद्देश्य इसी दिव्य धरोहर को पुनर्जीवित करना, संरक्षित करना और जनसामान्य तक पहुँचाना है।
हमारी पाठशाला में हम न केवल भाषा-शिक्षण पर बल देते हैं, अपितु संस्कृत साहित्य, वेद, उपनिषद्, व्याकरण, नाट्यशास्त्र एवं अन्य अनेक शास्त्रों की गूढ़ता को सरल एवं आधुनिक पद्धतियों के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयत्न करते हैं। विद्यार्थियों को केवल पाठ्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, विचारशीलता एवं सांस्कृतिक गौरव से भी समृद्ध किया जाता है।
मैं समस्त शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं सहयोगियों को धन्यवाद देती हूँ, जिनके सतत प्रयासों से यह संस्थान प्रगति के पथ पर अग्रसर है। आइए, हम सब मिलकर संस्कृत को जीवंत रखें और इसे भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बनाएं।
हरिः ओम्।
[भारतीबेन जोबनपुत्रा] निदेशिका संस्कृत पाठशाला